कोलकाता - पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया है। 19 मई को जारी इस सरकारी आदेश के बाद से देशभर में बहस छिड़ गई है।
दरअसल, कुछ दिन पहले ही सरकार ने स्कूलों की प्रार्थना सभा में भी वंदे मातरम को ज़रूरी किया था। अब मदरसों को भी इसी दायरे में लाया गया है। मदरसा शिक्षा निदेशालय ने साफ़ कहा है कि पढ़ाई शुरू होने से पहले हर रोज़ वंदे मातरम गाया जाएगा।
मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं का क्या कहना है?
कोलकाता ख़िलाफ़त कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने कहा कि वे भारत से प्यार करते हैं, लेकिन इस गीत की कुछ पंक्तियाँ इस्लाम के ख़िलाफ़ हैं। उनका कहना है कि मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करते हैं, किसी देश की "पूजा" नहीं।
एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने कहा कि वे वंदे मातरम का सम्मान करते हैं, लेकिन जब राष्ट्रगान गाते हैं तो गर्व से गाते हैं — इसे ज़बरदस्ती थोपना और न गाने पर देशद्रोही कहना सरासर ग़लत है।
वहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइज़ेशन के डॉक्टर उमर अहमद इल्यासी ने थोड़ा अलग नज़रिया रखा। उनका कहना है कि 'वंदे मातरम' और 'मादरे वतन ज़िंदाबाद' — दोनों का भाव एक ही है, बस भाषा अलग है। इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष ने भी घेरा सरकार को
सीपीआईएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पहले से बर्बाद हालत में है, और सरकार का ध्यान उसे सुधारने की बजाय इस बात पर है कि असेंबली में कौन सा गाना गाया जाए। उनके मुताबिक़ यह लोगों को भड़काने की कोशिश है।
आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर ने सीधे कहा — मदरसे सरकारी पैसे से नहीं, मुसलमानों के पैसे से चलते हैं। ऐसे में सरकार को यह आदेश देने का कोई हक़ नहीं।
बीजेपी नेताओं का पलटवार
बीजेपी प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है और इसे हर जगह गाया जाना चाहिए। जो भारत में रहते हैं, उन्हें यह गाना ही होगा।
हालाँकि बीजेपी नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने थोड़ा संतुलित रुख़ अपनाया। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर कोई भी सांप्रदायिकता का माहौल न बनाए — यह देश के सौहार्द के लिए नुक़सानदेह होगा।
पृष्ठभूमि
वंदे मातरम गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा था और बाद में इसे अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया। यह गीत ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा रहा है, लेकिन इसकी कुछ पंक्तियों को लेकर मुस्लिम समुदाय में हमेशा से आपत्तियाँ रही हैं।
यह विवाद नया नहीं है — लेकिन पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ बड़ी मुस्लिम आबादी है और बीजेपी पहली बार सत्ता में आई है, यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है।
0 टिप्पणियाँ